Home संत रामपाल जी महाराज का सर्व को संदेश संत रामपाल जी महाराज का सर्व को संदेश भूमिका अनादि काल से ही मानव परम शांति, सुख व अमृत्व की खोज में लगा हुआ है। वह अपने सामर्थ्य के अनुसार प्रयत्न करता आ रहा है लेकिन उसकी यह चाहत कभी पूर्ण नहीं हो पा रही है। ऐसा इसलिए है कि उसे इस चाहत को प्राप्त करने के मार्ग का पूर्ण ज्ञान नहीं है। सभी प्राणी चाहते हैं कि कोई कार्य न करना पड़े, खाने को स्वादिष्ट भोजन मिले, पहनने को सुन्दर वस्त्र मिलें, रहने को आलीशान भवन हों, घूमने के लिए सुन्दर पार्क हों, मनोरंजन करने के लिए मधुर-2 संगीत हों, नांचे-गांए, खेलें-कूदें, मौज-मस्ती मनांए और कभी बीमार न हों, कभी बूढ़े न हों और कभी मृत्यु न होवे आदि-2, परंतु जिस संसार में हम रह रहे हैं यहां न तो ऐसा कहीं पर नजर आता है और न ही ऐसा संभव है। क्योंकि यह लोक नाशवान है, इस लोक की हर वस्तु भी नाशवान है और इस लोक का राजा ब्रह्म काल है जो एक लाख मानव सूक्ष्म शरीर खाता है। उसने सब प्राणियों को कर्म-भर्म व पाप-पुण्य रूपी जाल में उलझा कर तीन लोक के पिंजरे में कैद किए हुए है। कबीर साहेब कहते हैं कि :-- कबीर, तीन लोक पिंजरा भया, पाप पुण्य दो जाल। सभी जीव भोजन भये, एक खाने वाला काल।। गरीब, एक पापी एक पुन्यी आया, एक है सूम दलेल रे। बिना भजन कोई काम नहीं आवै, सब है जम की जेल रे।। वह नहीं चाहता कि कोई प्राणी इस पिंजरे रूपी कैद से बाहर निकल जाए। वह यह भी नहीं चाहता कि जीव आत्मा को अपने निज घर सतलोक का पता चले। इसलिए वह अपनी त्रिगुणी माया से हर जीव को भ्रमित किए हुए है। फिर मानव को ये उपरोक्त चाहत कहां से उत्पन्न हुई है? यहां ऐसा कुछ भी नहीं है। यहां हम सबने मरना है, सब दुःखी व अशांत हैं। जिस स्थिति को हम यहां प्राप्त करना चाहते हैं ऐसी स्थिति में हम अपने निज घर सतलोक में रहते थे। काल ब्रह्म के लोक में स्व इच्छा से आकर फंस गए और अपने निज घर का रास्ता भूल गए। कबीर साहेब कहते हैं कि - इच्छा रूपी खेलन आया, तातैं सुख सागर नहीं पाया। इस काल ब्रह्म के लोक में शांति व सुख का नामोनिशान भी नहीं है। त्रिगुणी माया से उत्पन्न काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, राग-द्वेष, हर्ष-शोक, लाभ-हानि, मान-बड़ाई रूपी अवगुण हर जीव को परेशान किए हुए हैं। यहां एक जीव दूसरे जीव को मार कर खा जाता है, शोषण करता है, ईज्जत लूट लेता है, धन लूट लेता है, शांति छीन लेता है। यहां पर चारों तरफ आग लगी है। यदि आप शांति से रहना चाहोगे तो दूसरे आपको नहीं रहने देंगे। आपके न चाहते हुए भी चोर चोरी कर ले जाता है, डाकू डाका डाल ले जाता है, दुर्घटना घट जाती है, किसान की फसल खराब हो जाती है, व्यापारी का व्यापार ठप्प हो जाता है, राजा का राज छीन लिया जाता है, स्वस्थ शरीर में बीमारी लग जाती है अर्थात् यहां पर कोई भी वस्तु सुरक्षित नहीं। राजाओं के राज, ईज्जतदार की ईज्जत, धनवान का धन, ताकतवर की ताकत और यहां तक की हम सभी के शरीर भी अचानक छीन लिए जाते हैं। माता-पिता के सामने जवान बेटा-बेटी मर जाते हैं, दूध पीते बच्चों को रोते-बिलखते छोड़ कर मात-पिता मर जाते हैं, जवान बहनें विधवा हो जाती हैं और पहाड़ से दुःखों को भोगने को मजबूर होते हैं। विचार करें कि क्या यह स्थान रहने के लायक है ? लेकिन हम मजबूरी वश यहां रह रहे हैं क्योंकि इस काल के पिंजरे से बाहर निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आता और हमें दूसरों को दुःखी करने की व दुःख सहने की आदत सी बन गई। यदि आप जी को इस लोक में होने वाले दुःखों से बचाव करना है तो यहां के प्रभु काल से परम शक्ति युक्त परमेश्वर (परम अक्षर ब्रह्म) की शरण लेनी पड़ेगी। जिस परमेश्वर का खौफ काल प्रभु को भी है। जिस के डर से यह उपरोक्त कष्ट उस जीव को नहीं दे सकता जो पूर्ण परमात्मा अर्थात् परम अक्षर ब्रह्म (सत्य पुरूष) की शरण पूर्ण सन्त के बताए मार्ग से ग्रहण करता है। वह जब तक संसार में भक्ति करता रहेगा, उसको उपरोक्त कष्ट आजीवन नहीं होते। जो व्यक्ति इस पुस्तक ‘‘ज्ञान गंगा’’ को पढ़ेगा उसको ज्ञान हो जाएगा कि हम अपने निज घर को भूल गए हैं। वह परम शांति व सुख यहां न होकर निज घर सतलोक में है जहां पर न जन्म है, न मृत्यु है, न बुढ़ापा, न दुःख, न कोई लड़ाई-झगड़ा है, न कोई बिमारी है, न पैसे का कोई लेन-देन है, न मनोरंजन के साधन खरीदना है। वहां पर सब परमात्मा द्वारा निःशुल्क व अखण्ड है। बिन ही मुख सारंग राग सुन, बिन ही तंती तार। बिना सुर अलगोजे बजैं, नगर नांच घुमार।। घण्टा बाजै ताल नग, मंजीरे डफ झांझ। मूरली मधुर सुहावनी, निसबासर और सांझ।। बीन बिहंगम बाजहिं, तरक तम्बूरे तीर। राग खण्ड नहीं होत है, बंध्या रहत समीर।। तरक नहीं तोरा नहीं, नांही कशीस कबाब। अमृत प्याले मध पीवैं, ज्यों भाटी चवैं शराब।। मतवाले मस्तानपुर, गली-2 गुलजार। संख शराबी फिरत हैं, चलो तास बजार।। संख-संख पत्नी नाचैं, गावैं शब्द सुभान। चंद्र बदन सूरजमुखी, नांही मान गुमान।। संख हिंडोले नूर नग, झूलैं संत हजूर। तख्त धनी के पास कर, ऐसा मुलक जहूर।। नदी नाव नाले बगैं, छूटैं फुहारे सुन्न। भरे होद सरवर सदा, नहीं पाप नहीं पुण्य।। ना कोई भिक्षुक दान दे, ना कोई हार व्यवहार। ना कोई जन्मे मरे, ऐसा देश हमार।। जहां संखों लहर मेहर की उपजैं, कहर जहां नहीं कोई। दासगरीब अचल अविनाशी, सुख का सागर सोई।। सतलोक में केवल एक रस परम शांति व सुख है। जब तक हम सतलोक में नहीं जाएंगे तब तक हम परमशांति, सुख व अमृत्व को प्राप्त नहीं कर सकते। सतलोक में जाना तभी संभव है जब हम पूर्ण संत से उपदेश लेकर पूर्ण परमात्मा की आजीवन भक्ति करते रहें। इस पुस्तक ‘‘ज्ञान गंगा’’ के माध्यम से जो हम संदेश देना चाहते हैं उसमें किसी देवी-देवता व धर्म की बुराई न करके सर्व पवित्र धर्म ग्रंथों में छुपे गूढ रहस्य को उजागर करके यथार्थ भक्ति मार्ग बताना चाहा है जो कि वर्तमान के सर्व संत, महंत व आचार्य गुरु साहेबान शास्त्रों में छिपे गूढ रहस्य को समझ नहीं पाए। परम पूज्य कबीर साहेब अपनी वाणी में कहते हैं कि - ‘वेद कतेब झूठे ना भाई, झूठे हैं सो समझे नांही। जिस कारण भक्त समाज को अपार हानि हो रही है। सब अपने अनुमान से व झूठे गुरुओं द्वारा बताई गई शास्त्र विरूद्ध साधना करते हैं। जिससे न मानसिक शांति मिलती है और न ही शारीरिक सुख, न ही घर व कारोबार में लाभ होता है और न ही परमेश्वर का साक्षात्कार होता है और न ही मोक्ष प्राप्ति होती है। यह सब सुख कैसे मिले तथा यह जानने के लिए कि मैं कौन हूं, कहां से आया हूं, क्यों जन्म लेता हूं,  क्यों मरता हूं और क्यों दुःख भोगता हूं ? आखिर यह सब कौन करवा रहा है और परमेश्वर कौन है, कैसा है, कहां है तथा कैसे मिलेगा और ब्रह्मा, विष्णु और शिव के माता-पिता कौन हैं और किस प्रकार से काल ब्रह्म की जेल से छुटकारा पाकर अपने निज घर (सतलोक) में वापिस जा सकते हैं। यह सब इस पुस्तक के माध्यम से दर्शाया गया है ताकि इसे पढ़कर आम भक्तात्मा का कल्याण संभव हो सके। यह पुस्तक सतगुरु रामपाल जी महाराज के प्रवचनों का संग्रह है जो कि सद्ग्रन्थों में लिखे तथ्यों पर आधारित है। हमें पूर्ण विश्वास है कि जो पाठकजन रूची व निष्पक्ष भाव से पढ़ कर अनुसरण करेगा। उसका कल्याण संभव है:- ”आत्म प्राण उद्धार ही, ऐसा धर्म नहीं और। कोटि अश्वमेघ यज्ञ, सकल समाना भौर।।“ जीव उद्धार परम पुण्य, ऐसा कर्म नहीं और। मरूस्थल के मृग ज्यों, सब मर गये दौर-दौर।। भावार्थ :- यदि एक आत्मा को सतभक्ति मार्ग पर लगाकर उसका आत्म कल्याण करवा दिया जाए तो करोड़ अवश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है और उसके बराबर कोई भी धर्म नहीं है। जीवात्मा के उद्धार के लिए किए गए कार्य अर्थात् सेवा से श्रेष्ठ कोई भी कार्य नहीं है। अपने पेट भरने के लिए तो पशु-पक्षी भी सारा दिन भ्रमते हैं। उसी तरह वह व्यक्ति है, जो परमार्थी कार्य नहीं करता, परमार्थी कर्म सर्वश्रेष्ठ सेवा जीव कल्याण के लिए किया कर्म है। जीव कल्याण का कार्य न करके सर्व मानव मरूस्थल के हिरण की तरह दौड़-2 कर मर जाते हैं। जिसे कुछ दूरी पर जल ही जल दिखाई देता है और वहां दौड़ कर जाने पर थल ही प्राप्त होता है। फिर कुछ दूरी पर थल का जल दिखाई देता है अन्त में उस हिरण की प्यास से ही मृत्यु हो जाती है। ठीक इसी प्रकार जो प्राणी इस काल लोक में जहां हम रह रहे है। वे उस हिरण के समान सुख की आशा करते हैं जैसे निःसन्तान सोचता है सन्तान होने पर सुखी हो जाऊँगा। सन्तान वालों से पूछें तो उनकी अनेकों समस्याऐं सुनने को मिलेंगी। निर्धन व्यक्ति सोचता है कि धन हो जाए तो में सुखी हो जाऊं। जब धनवानों की कुशल जानने के लिए प्रश्न करोगे तो ढेर सारी परेशानियाँ सुनने को मिलेंगी। कोई राज्य प्राप्ति से सुख मानता है, यह उसकी महाभूल है। राजा (मन्त्री, मुख्यमन्त्री, प्रधानमन्त्री, राष्ट्रपति) को स्वपन में भी सुख नहीं होता। जैसे चार-पांच सदस्यों के परिवार का मुखिया अपने परिवार के प्रबन्ध में कितना परेशान रहता है। राजा तो एक क्षेत्र का मुखिया होता है। उसके प्रबन्ध में सुख स्वपन में भी नहीं होता। राजा लोग शराब पीकर कुछ गम भुलाते हैं। माया इकट्ठा करने के लिए जनता से कर लेते हैं फिर अगले जन्मों में जो राजा सत्यभक्ति नहीं करते, पशु योनियों को प्राप्त होकर प्रत्येक व्यक्ति से वसूले कर को उनके पशु बनकर लौटाते हैं। जो व्यक्ति मनमुखी होकर तथा झूठे गुरुओं से दिक्षित होकर भक्ति तथा धर्म करते हैं। वे सोचते हैं कि भविष्य में सुख होगा लेकिन इसके विपरित दुःख ही प्राप्त होता है। कबीर साहेब कहते हैं कि मेरा यह ज्ञान ऐसा है कि यदि ज्ञानी पुरुष होगा तो इसे सुनकर हृदय में बसा लेगा और यदि मूर्ख होगा तो उसकी समझ से बाहर है। “कबीर, ज्ञानी हो तो हृदय लगाई, मूर्ख हो तो गम ना पाई“ अधिक जानकारी के लिए कृप्या प्रवेश करें पुस्तक ‘‘ज्ञान गंगा’’ में।  LATEST BOOKS संत रामपाल जी महाराज का सर्व को संदेश भक्ति सौदागर को संदेश नाम कौन से राम का जपना है ? 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रामपाल (हरियाणा)

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रामपाल


रामपाल

जन्म रामपाल सिंह जतिन

8 सितम्बर 1951 (आयु 70)

धनाना , पंजाब (अभी हरियाणा), भारत में

राष्ट्रीयता भारतीय

अन्य नाम संत रामपाल जी महाराज ,रामपाल दास , जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज , संत रामपाल ,

व्यवसाय कबीर पंथ समुदाय के संस्थापक

प्रसिद्धि कारण सतलोक आश्रम संस्थापक

वेबसाइट

www.jagatgururampalji.org

रामपाल (अंग्रेजी :Rampal) एक भारतीय आध्यात्मिक कबीर पंथी गुरु हैं तथा कबीर साहेब जी को भगवान (परमात्मा) बताते हैं। ये सतलोक आश्रम के संस्थापक भी हैं जो कि भारतीय राज्य हरियाणा के हिसार क्षेत्र में स्थित है।[1]



अनुक्रम

1 जीवन

2 शिक्षा और नियम

3 भविष्यवाणीयां

4 विवाद

5 सन्दर्भ

जीवन[संपादित करें]

रामपाल का जन्म सोनीपत के धनाणा गांव में 8 सितंबर 1951 को हुआ था।[2] अपनी शिक्षा पूर्ण करने के तत्पश्चात ये हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में अभियंता बन गए थे। इनकी आधिकारिक जीवनी के अनुसार, ये बचपन से ही सभी हिंदू देवी देवताओं के कठोर भक्त थे।[3] लेकिन इस भक्ति से इन्हें कभी आत्मिक शांति का अनुभव नहीं हुआ। एक दिन ये एक कबीर पंथी गुरू स्वामी रामदेवानंद से मिले। जिन्होंने इन्हें समझाया कि कि उनके द्वारा की जा रही भक्ति की विधि हमारे ही धर्म ग्रंथों से मेल नहीं खाती। अतः वे इस भक्ति विधि से मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकते क्योंकि श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 16 श्लोक 23 के अनुसार जो मनुष्य शास्त्रविधिको छोड़कर अपनी इच्छासे मनमाना आचरण करता है, वह न सिद्धि को, न सुखको और न परमगतिको ही प्राप्त होता है।[3]


रामपाल दास का कहना है कि इसके पश्चात इन्होंने भगवत गीता, कबीर सागर, गरीबदास द्वारा रचित सत ग्रंथ, पुराण, वेद तथा अन्य कई ग्रंथ पढ़े। इनका मानना है कि इन्हें इन पुस्तकों में स्वामी रामदेवानंद द्वारा बताए वचनों के प्रमाण मिले, तत्पश्चात इन्होंने स्वामी रामदेवानंदजी द्वारा बताए मंत्रों का घोर जाप किया जिसके बाद इन्हें आत्मिक शांति महसूस होने लगी।[3] 1994 में स्वामी रामदेवानंद ने इन्हें गुरू पद दे दिया। उसके बाद ये "संत रामपाल दास" बन गए।[3] सन् 1995 में उन्होंने अपने अभियंता पद से इस्तीफा दे दिया जोकि 2000 में स्वीकृत हुआ।[3] और बाद में करोंथा गांव में सतलोक आश्रम की स्थापना की थी, हालांकि 2006 में इनके गिरफ्तार होने के बाद सेे ये आश्रम सरकार के निरीक्षण में है।


शिक्षा और नियम[संपादित करें]

रामपाल सभी धर्म के ग्रंथों का हवाला देते हुए कबीर को सभी देवी-देवताओं सहित संपूर्ण ब्रह्मांडों का उत्पत्तिकर्ता मानते हैं और भक्ति को सभी सांसारिक कर्मों से श्रेष्ठ मानते हुए सभी बुराइयों को छोड़कर एक कबीर परमेश्वर की भक्ति हेतु प्रेरित करते हैं। बुराइयां त्यागने के लिए तथा समाज सुधार के लिए भी कुछ नियम बनाए है जिनको भक्ति मर्यादा कहते हैं। जैसे[1]


1. किसी नशीली वस्तु जैसे बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू, सुल्फी, गांजा, शराब, अंडा,मांस आदि का सेवन तो दूर किसी को लाकर भी नहीं देना।[1]


2. जुआ, ताश, चोरी, ठगी आदि नहीं करना।[1]


3. मृत्यु भोज, दहेज, दिखावे के नाम पर फिजूलखर्ची, मुंडन समाधि पूजन, पित्र पूजा, मूर्ति पूजा,आदि नहीं करना।[1]


4. एक कबीर परमात्मा के अलावा अन्य देवी देवताओं की पूजा नहीं करना, सम्मान सबका करना।[1]


5. अश्लील गाने गाना, नाचना, व्याभिचार आदि पूर्णतया वर्जित बताते हैं।[1]


रामपाल के अनुयाई विशेष तौर पर उनके ज्ञान से आकर्षित होते हैं, जो सर्व धर्मो के ग्रंथों के अनुकूल होने का दावा किया है। उनके अधिकतर अनुयाइयों का कहना है कि हमने संत द्वारा बताए ज्ञान को सद्ग्रंथों में मिलाया, तब हूबहू अपने धार्मिक ग्रंथों में पाया, उसके बाद हम उनसे जुड़े। हालांकि ज्ञान ही ऐसा विषय है जिसके कारण अधिकतर समुदाय उनका विरोध करते हैं।[4]


रामपाल ने अपने ज्ञान से दुनिया को अवगत कराने के लिए ज्ञान गंगा, जीने की राह, गीता तेरा ज्ञान अमृत, गरीमा गीता की, गहरी नज़र गीता में आदि पुस्तकें भी लिखी है।[4]


भविष्यवाणीयां[संपादित करें]

संत के अनुयायियों का कहना है कि दुनिया भर के कई भविष्यवक्ताओं की भविष्यवाणियां संत रामपाल पर सटीक बैठती हैं[5] कि वे महामानव के रूप में जाने जाएंगे। जिनमें कुछ निम्न हैं-[6]


जयगुरुदेव पंथ के तुलसी साहेब ने ७ सितंबर १९७१ को कहा कि जिस महापुरुष का हमें इंतजार है वह आज २० वर्ष का हो चुका है। उस दिन संत रामपाल की उम्र २० वर्ष हुई थी।[7]


नॉस्त्रेदमस ने कहा था कि २००६ में एक संत अचानक प्रकाश में आएगा जो पहले उपेक्षा का पात्र बनेगा लेकिन बाद में दुनिया सर आंखों पर बिठाएगी।[8]


इसी तरह अन्य भविष्यवक्ताओं जैसे अमेरिका की विश्व विख्यात भविष्यवक्ता फ्लोरेंस, इंग्लैंड के ज्योतिषी ‘कीरो‘, हंगरी की महिला ज्योतिषी “बोरिस्का” आदि की भविष्यवाणियों को संत रामपाल पर सटीक बैठने का दावा किया जाता है।[9]


विवाद[संपादित करें]

सन् २००६ में संत रामपाल ने सार्वजनिक तौर पर सत्यार्थ प्रकाश के कुछ भागों पर आपत्ति जताई थी।[10] इससे गुस्साए आर्य समाज के हजारों समर्थको ने १२ जुलाई२००६ को करौथा के सतलोक आश्रम का घेराव कर लिया व हमला किया।[11] बचाव में सतलोक आश्रम के अनुयायियों ने भी पलटवार किया। इस झड़प में सोनू नामक एक आर्य समाजी अनुयायी की हत्या हो गई।[11] जिसमें संतरामपाल के विरुद्ध हत्या का केस चलाया गया व उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।[11] कुछ महीने जेल में बिताने के बाद, २००८ में इन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया। नवंबर २०१४ में पुनः कोर्ट ने इन्हें गिरफ्तार करने का आदेश दिया। लेकिन सतलोक आश्रम बरवाला में हज़ारों समर्थकों की मौजुदगी के कारण पुलिस इन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी।[12] १९ नवंबर २०१४ को समर्थकों व पुलिस के बीच हुई हिंसा के बाद इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।[12] इसमें ५ महिलाओं और १ बालक की मृत्यु हुई जिनका मुकदमा संत रामपाल दास पर बनाया गया। ये बंधक बनाने के मुकदमे में २९ अगस्त २०१७ को बरी हो गए[13]।[14] लेकिन हत्या व देशद्रोह के मुकदमे के कारण जेल में ही हैं।[12] ११अक्टूबर २०१८ को हिसार कोर्ट द्वारा इन्हें तथा इनके कुछ अनुयायियों को बरवाला की घटना में हुई हत्याओं का दोषी करार कर दिया गया एवं आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।[15] जज वेद प्रकाश सिरोही, सेशन जज हिसार द्वारा 26 जुलाई 2021 को संत रामपाल जी सहित 4 अनुयायियों जिनमें डॉक्टर ओम प्रकाश सिंह हुड्डा, राजेंदर, बलजीत, बिजेन्दर शामिल हैं को केस नम्बर 5, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कोई भी साक्ष्य न होने के कारण एवं आरोपों के बेबुनियाद साबित करते हुए उन्हें बाइज्जत बरी किया है।[16][17]


सन्दर्भ[संपादित करें]

↑ इस तक ऊपर जायें: अ आ इ ई उ ऊ ए "गुरु दीक्षा के नाम पर रामपाल के थे 11 अजीबो गरीब नियम". m.jagran.com. अभिगमन तिथि 2021-06-29.

↑ "संत रामपाल जी महाराज जी की जीवनी - Jagat Guru Rampal Ji". www.jagatgururampalji.org. अभिगमन तिथि 2021-06-23.

↑ इस तक ऊपर जायें: अ आ इ ई उ "A Brief Introduction of Saint Rampal Ji Sahib's Life History". मूल से 19 अप्रैल 2020 को पुरालेखित.

↑ इस तक ऊपर जायें: अ आ "गीता फोगाट ने ट्वीटर पर दिया ज्ञान, लोगों ने कहा, संत रामपाल की किताब पढ़िए ज्ञान बढ़ेगा!". Jansatta. 2017-08-23. अभिगमन तिथि 2021-06-25.

↑ "नास्त्रेदमस व अन्य भविष्यवक्ताओं की भविष्यवाणियां-नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी 2020". S A NEWS (अंग्रेज़ी में). 2020-01-19. अभिगमन तिथि 2021-08-02.

↑ "Twitterati Wonder if Nostradamus Had Predicted Indian Self-Styled Saint #Rampal". sputniknews.com (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2021-06-25.

↑ "तुलसीदास महाराज, जय गुरुदेव - इटावा ज़िला यह क्या है |". ww.in.freejournal.info. अभिगमन तिथि 2021-06-25.

↑ "रामपाल कहता था कि नास्त्रेदमस ने की थी उसके अवतार लेने की भविष्यवाणी". News18 Hindi. अभिगमन तिथि 2021-06-25.

↑ "11 reasons why Saint RampalJi Maharaj is trending Number 1 on Twitter". Asianet News Network Pvt Ltd (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2021-06-25.

↑ "Rohtak clash: Sant Rampal triggered it". मूल से 20 जुलाई 2019 को पुरालेखित.

↑ इस तक ऊपर जायें: अ आ इ "Krontha incident". मूल से 10 जुलाई 2019 को पुरालेखित.

↑ इस तक ऊपर जायें: अ आ इ "Sant Rampal acquitted in two criminal cases". मूल से 2 सितंबर 2017 को पुरालेखित.

↑ "संत रामपाल दो मामलों में बरी, रहेंगे जेल में". BBC News हिंदी. अभिगमन तिथि 2021-06-25.

↑ "सतलोक आश्रम के प्रमुख संत रामपाल बरी, लोगों को बंधक बनाने का था आरोप". आज तक. अभिगमन तिथि 2021-06-25.

↑ "Sant Rampal, 14 others sentenced to life for murder of four women".

↑ "ड्रग्स एवं कॉस्मेटिक केस में संत रामपाल जी सहित पांच अनुयायी हुए बरी | SA News". S A NEWS (अंग्रेज़ी में). 2021-07-27. अभिगमन तिथि 2021-08-17.

↑ "हरियाणाः हिसार कोर्ट ने इस मामले में रामपाल समेत 5 को बरी किया, 7 साल पहले हुए थे गिरफ्तार". आज तक. अभिगमन तिथि 2021-08-17.

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